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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi
‘‘दृष्टव्य है कि क्रोध से भ्रम पैदा होता है और भम्र से बुद्धि व्यग्र होती है जो मनुष्य के पतन का कारण है।’’
I have a lantern. You steal my lantern. What, then is your honor worth no more to you than the price of my lantern!
जिस प्रकार देश की स्वतंत्रता के वर्ष 1947 से लेकर वर्ष 2010 तक यानी 63 वर्ष के काल को हम सामाजिक स्वतंत्रता (Freedom Of People) की व्यापकता से पैदा होने वाले......
मनुष्य रात-दिन दूसरों को कोसता है। अपने विपरीत कर्म के लिये भी दूसरों को ही जिम्मेवार ठहराने का प्रयास करता है। गलती स्वयं करें, फिर भी ठिकरा दूसरों के सिर पर...
विकास के नये दौर को हम जिस तरह Labour v/s Leisure (परिश्रम के स्थान पर आराम) इकोनॉमी और उससे पैदा होने वाली बेरोजगारी बढ़ाने वाली समाज व्यवस्था के नाम से...
जब कोई देश Global Capitalist System की व्यवस्था को अपना लेता है तो वहां पूंजी प्रधान ऐसे अनेक घटनाक्रम घटित होते चले जाते हैं जो दिखने में व्यक्ति की सफलता......
जब कोई देश Creative के स्थान पर Distributive Capitalism या जो रुपैया जमा है उसे ही नहीं वरन अप्रत्याशित उधार लेकर विकास करने की प्रक्रिया को अपनाते हुए गति......